जब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तो मोल कहाँ कुछ रह पाए। फिर किसकी इच्छा शेष रहेगी, कैसे मन से कह पाओगे? जो चाहा समय से पहले मिले, तो मिलने का भी पता न …
Read moreकौन हूँ मैं? अपने अंतर्मन की आवाज़ हूँ, दर्पण हूँ, अपने कल के सपनों की। अपनी ऊंची उड़ान की पंख हूँ, खुशबू हूँ अपनी ही बगिया की। अपने ही सवालों का ज…
Read moreकुछ ना भी हुआ तो क्या होगा? मैं चलते-चलते रुक जाऊँगी। रुककर मैं शायद देर से चल पाऊँगी, अपनी कहानी को दुनिया के सामने, देर से रख पाऊँगी। इसी झुंझला…
Read moreभेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी, लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी। थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की, ब…
Read moreकह देने भर से क्या सब सही हो जाता है, वक्त का रूठना और जिंदगी का छूटना। बीते लम्हों में फिर से खो जाना, अधूरी यादों को किसी डायरी में कैद कर पाना। …
Read moreबीते लम्हों से बस, इतना ही है कहना, आकर यादों की दहलीज पर, अब सताया ना करो। जो बीत गया है, उसे बीता ही रहने दो, नई ज़िंदगी के दरवाज़े पर, दस्तक ना …
Read moreयहीं जिंदगी हैं और में जिए जा रहा हूं खुशी हो या गम हर वक्त वादियों के साथ बाट रहा हूं प्रकृति से प्यार हैं मुझे प्रकृति की हर चीज़ से अपने आप…
Read moreकरेंगे न याद, काम तो बहुत है, सोचता तो था। यादों में खो जाने की तड़प होगी कभी सोचा न था। By Sahil
Read moreओनम की आए खुशियाँ बहार, खेतों में बसे सजीव रंग न्यार। पुकारती हैं वंशजों की यह आवाज, आओ, मिलकर मनाएं ओनम की राज। पुलकित हृदय सपनों से सजा, खिलते फूल…
Read moreगुलज़ार द्वारा लिखी किताब *_The longest short story of my life with grace_*जो उन्होंने *"राखी"*को समर्पित की है से एक अंश... लोग सच कहते ह…
Read moreसुबह की वो घंटी , नींद से जगाती थी , माँ की आवाज़ में ही दुनिया बस जाती थी। कंधे पे बस्ता , सपनों से भरा हुआ , काग़ज़ की ना…
Read moreसुबह - सुबह स्कूल की घंटी , बस्ता लेकर आया , टीचर बोली – “ पढ़ ले बेटा , बोर्ड का साल है भाई !” पर जब खोले किताबें मैंने , आँखों …
Read moreमुझे मैथ ना आए मैथ ना आए , मैथ ना आए मुझे साइंस ना आए साइंस ना आए , साइंस ना आए मुझे मैथ ना आए ओ ओ मुझे मैथ ना आए मुझे…
Read more