Poems
हाँ, मेरा स्वाभिमान लोगों से बड़ा है। Self Respect Poem
हाँ, मेरा स्वाभिमान लोगों से बड़ा है, अपने ही संकल्प पर अडिग खड़ा है। छोटी बातों की …
हाँ, मेरा स्वाभिमान लोगों से बड़ा है, अपने ही संकल्प पर अडिग खड़ा है। छोटी बातों की आँधी में भी जो कभी नहीं बिखरा है। वो अपने अंतर्मन की धड़कन पहचा…
Read moreएक काम करो, फ़ुरसत में तुम खुद को याद करो। क्या भूल गए खुद को? या अब भी याद करते हो? आखिरी बार खुद से बात कब की थी? बाकियों को छोड़ो... खुद से मुल…
Read moreमन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ विश्वविद्यालय , कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर )- garima.mantu786@gma…
Read more“ आपका बंटी ” का मनोवैज्ञानिक अध्ययन एवं मूल्यांकन गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ विश्वविद्यालय , कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर )- garima.mantu786…
Read moreसुना है मैंने बहुत कुछ अपने बारे में, सबकी कहानियों में खुद को अलग-थलग पाया है। कहीं कोई किरदार, कहीं रंग-रूप, तो कहीं सिर्फ नज़रियों का साया है। कभी…
Read moreमेरा घर उस गली में बसता है, जहाँ लोगों का दिल और दिमाग खुलता है। बड़ा सा बगीचा, उसमें झूलता एक झूला, शाम की चाय और पड़ोसियों से गपशप का सिलसिला। …
Read moreजब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तो मोल कहाँ कुछ रह पाए। फिर किसकी इच्छा शेष रहेगी, कैसे मन से कह पाओगे? जो चाहा समय से पहले मिले, तो मिलने का भी पता न …
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हाँ, मेरा स्वाभिमान लोगों से बड़ा है, अपने ही संकल्प पर अडिग खड़ा है। छोटी बातों की …