Vol-12-Issue-2-Feb-2026
मन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना Mannu Bhandari
मन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ…
मन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ विश्वविद्यालय , कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर )- garima.mantu786@gma…
Read more“ आपका बंटी ” का मनोवैज्ञानिक अध्ययन एवं मूल्यांकन गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ विश्वविद्यालय , कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर )- garima.mantu786…
Read moreसुना है मैंने बहुत कुछ अपने बारे में, सबकी कहानियों में खुद को अलग-थलग पाया है। कहीं कोई किरदार, कहीं रंग-रूप, तो कहीं सिर्फ नज़रियों का साया है। कभी…
Read moreमेरा घर उस गली में बसता है, जहाँ लोगों का दिल और दिमाग खुलता है। बड़ा सा बगीचा, उसमें झूलता एक झूला, शाम की चाय और पड़ोसियों से गपशप का सिलसिला। …
Read moreजब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तो मोल कहाँ कुछ रह पाए। फिर किसकी इच्छा शेष रहेगी, कैसे मन से कह पाओगे? जो चाहा समय से पहले मिले, तो मिलने का भी पता न …
Read moreकौन हूँ मैं? अपने अंतर्मन की आवाज़ हूँ, दर्पण हूँ, अपने कल के सपनों की। अपनी ऊंची उड़ान की पंख हूँ, खुशबू हूँ अपनी ही बगिया की। अपने ही सवालों का ज…
Read moreकुछ ना भी हुआ तो क्या होगा? मैं चलते-चलते रुक जाऊँगी। रुककर मैं शायद देर से चल पाऊँगी, अपनी कहानी को दुनिया के सामने, देर से रख पाऊँगी। इसी झुंझला…
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Vol-12-Issue-2-Feb-2026
मन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना गरिमा सिंह ( शोधछात्रा , सिद्धार्थ…