Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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खुद के नाम एक ख़त A Letter to Myself Poem



भेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी,
लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी।

थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की,
बहुत जल्दी की, फुर्सत की कमी की, खुद को आखिर में रखने की।

​समय की, जो हो भी सकता था और जो ना भी हुआ,
रूठने की, खुद से ही मान जाने की, एक खालीपन की।

एक चिट्ठी, जिसमें सिर्फ मेरा ही नाम होगा,
मेरे ही नाम, मेरा ही एक पैगाम होगा।

​शुरुआत में 'प्रिये' और आखिर में 'तुम्हारी' होगा,
जिसमें कुछ खट्टे-मीठे पल, मेरी मुस्कुराहट और मेरे ही रंग होंगे।

एक खत, देर से ही सही, मेरे लिए मेरा हर वो राज़ होगा,
जिसमें तसल्ली की तारीख, और सुकून से मेरा पता होगा।

​एक खत... जो सिर्फ मेरे नाम होगा।

Anupama Arya

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