मिल जाए तो ज़िंदगी, बिछड़ जाए तो ज़िंदगी, हंसी है ज़िंदगी, ग़म है ज़िंदगी, दो पल सुकून है ज़िंदगी। कड़वाहटों के बोझ तले, दबी हुई है ज़िंदगी, कभी ज़मी…
Read moreभेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी, लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी। थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की, ब…
Read moreसौरभ मराठे शोधार्थी – इतिहास विभाग lk¡ph c©)&Òkjrh; Kku v/;;u fo'ofo|kYk; , lk¡ph] jk;lsu ¼e-Á-½ शोध सारांश गुप्त काल (लगभग 320…
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