मिल जाए तो ज़िंदगी, बिछड़ जाए तो ज़िंदगी,

हंसी है ज़िंदगी, ग़म है ज़िंदगी, दो पल सुकून है ज़िंदगी।

​कड़वाहटों के बोझ तले, दबी हुई है ज़िंदगी,
कभी ज़मीन का सच, तो कभी खुला आसमां है ज़िंदगी।

​कभी हिसाबों की उलझी कहानी है ज़िंदगी,
कभी जोड़-घटाव की जुबानी है ज़िंदगी।

​कभी कांटों की चुभन, कभी खुशबू का एहसास है ज़िंदगी,
कभी एकांत की शांति, कभी अपनों का साथ है ज़िंदगी।

​कभी हैरान करती, कभी साथ चलती है ज़िंदगी,
शुरुआत से अंत तक, एक बहती नदी है ज़िंदगी।

​जन्म से लेकर मृत्यु तक, बस एक सफर है ज़िंदगी।

Anupama Arya