Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695
सुबह की वो घंटी , नींद से जगाती थी , माँ की आवाज़ में ही दुनिया बस जाती थी। कंधे पे बस्ता , सपनों से भरा हुआ , काग़ज़ की ना…