कुछ ना भी हुआ तो क्या होगा? मैं चलते-चलते रुक जाऊँगी। रुककर मैं शायद देर से चल पाऊँगी, अपनी कहानी को दुनिया के सामने, देर से रख पाऊँगी। इसी झुंझला…
Read moreमिल जाए तो ज़िंदगी, बिछड़ जाए तो ज़िंदगी, हंसी है ज़िंदगी, ग़म है ज़िंदगी, दो पल सुकून है ज़िंदगी। कड़वाहटों के बोझ तले, दबी हुई है ज़िंदगी, कभी ज़मी…
Read moreभेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी, लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी। थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की, ब…
Read moreकह देने भर से क्या सब सही हो जाता है, वक्त का रूठना और जिंदगी का छूटना। बीते लम्हों में फिर से खो जाना, अधूरी यादों को किसी डायरी में कैद कर पाना। …
Read moreबीते लम्हों से बस, इतना ही है कहना, आकर यादों की दहलीज पर, अब सताया ना करो। जो बीत गया है, उसे बीता ही रहने दो, नई ज़िंदगी के दरवाज़े पर, दस्तक ना …
Read moreयहीं जिंदगी हैं और में जिए जा रहा हूं खुशी हो या गम हर वक्त वादियों के साथ बाट रहा हूं प्रकृति से प्यार हैं मुझे प्रकृति की हर चीज़ से अपने आप…
Read moreअपने ना जाने कब क्यों रूठ जाते हैं देखे हुए सपने क्यों टूट जाते हैं दिल में है दर्द इतना कि बता नहीं सकते ग़म है पर हम तो रहते हैं हंसते आँख…
Read moreBy P. Dishu Gangwar , जिन्दगी है उलझनों का, एक कुशादा, कुछ नही है मैं से हम तक का सफर है, हम से ज्यादा कुछ नहीं है । दृढ़ अगर संकल्प है फिर , पथ की…
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