बीते लम्हों से बस, इतना ही है कहना,
आकर यादों की दहलीज पर, अब सताया ना करो।
जो बीत गया है, उसे बीता ही रहने दो,
नई ज़िंदगी के दरवाज़े पर, दस्तक ना दिया करो।
माना बीते लम्हों में, मेरा ही एक हिस्सा था,
वो भी सही था, वो भी मेरा ही किस्सा था।
पर अब नए लम्हों की, नई कहानी बुननी है,
नए सपनों की, एक नई उमंग चुननी है।
अंधेरे से उजाले की ओर, अब एक पैगाम होगा,
मेरे हर नए ख्वाब में, खुशियों का आगाज़ होगा।
मुझे सब नया करना है—नई तरंग, नया जोश,
भरने हैं जीवन के खाली कैनवास पर, नए रंग और भरने है।
जो मेरे हिसाब का होगा, अब वो ही चुनाव होगा,
नपा-तुला नहीं, अब रूह का अपना फैलाव होगा।
मेरे ही दर्पण में अब, निखरा हुआ मेरा अक्स होगा,
मेरी नई ज़िंदगी का, ये पहला और सुनहरा अध्याय होगा।
Anupama Arya
Place: Agra, Uttar Pradesh, India

