Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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कह देने भर से क्या सब सही हो जाता है। All is Well Hindi Poem

 


कह देने भर से क्या सब सही हो जाता है,
वक्त का रूठना और जिंदगी का छूटना।
बीते लम्हों में फिर से खो जाना,
अधूरी यादों को किसी डायरी में कैद कर पाना।
​मुश्किल है खुद के आंसू को रोक पाना,
खुद की हंसी को फिर से पकड़ पाना।
खुद को बहते सफर में बस बहने देना,
खुद के अंतर्मन से फिर संवाद करना।
​किसी नए को अपनाना, किसी पुराने को छोड़ देना,
खुद के दर्द में, खुद ही दवा बन जाना।
खुद को डूबते हुए, खुद ही किनारे पर ले आना,
जिंदगी कठोर है, बस यह कहकर आगे बढ़ जाना।
​चिंता और चिंतन से मुक्त हो जाना,
कह देने भर से क्या यह सब सही हो पाएगा।
जब भी सोचती हूं, अंतर्मन में दुविधा होती है,
सवालों के घेरे में, बस जवाब की तलाश होती है।
​माना कि जिंदगी हर कदम पर बेवजह होती है,
मगर हर तलाश ही, नए रास्तों की शुरुआत होती है।