Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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यहीं जिंदगी है This is Life Poem

 यहीं जिंदगी हैं 


और में जिए जा रहा हूं 
खुशी हो या गम 
हर वक्त वादियों
के साथ बाट रहा हूं 
प्रकृति से प्यार हैं मुझे 
प्रकृति की हर चीज़ से अपने आप को मिला रहा हूं 
कल किसने देखा हैं 
में तो आज में जिए जा रहा हूं 

हर सवेरे नया सोचता हूं 
और उस सोच में हर वक्त खुद को खोज रहा हूं 
यहीं जिंदगी हैं 
और में जिए जा रहा हूं 

अजीब सा एहसास है 
इस हवाओ में 
में इस से अपनी सांसे मिला रहा हूं 
यहीं जिंदगी हैं 
और में जिए जा रहा हूं 

सुकून की तलाश में 
मुसाफ़िर सा फिर रहा हूं 
ज़िंदगी दो पल की हैं 
समझकर जी रहा हूं 
यहीं जिंदगी हैं 
और में जिए जा रहा हूं 


लेखक राकेश वर्मा राजस्थान