यहीं जिंदगी हैं
और में जिए जा रहा हूं
खुशी हो या गम
हर वक्त वादियों
के साथ बाट रहा हूं
प्रकृति से प्यार हैं मुझे
प्रकृति की हर चीज़ से अपने आप को मिला रहा हूं
कल किसने देखा हैं
में तो आज में जिए जा रहा हूं
हर सवेरे नया सोचता हूं
और उस सोच में हर वक्त खुद को खोज रहा हूं
यहीं जिंदगी हैं
और में जिए जा रहा हूं
अजीब सा एहसास है
इस हवाओ में
में इस से अपनी सांसे मिला रहा हूं
यहीं जिंदगी हैं
और में जिए जा रहा हूं
सुकून की तलाश में
मुसाफ़िर सा फिर रहा हूं
ज़िंदगी दो पल की हैं
समझकर जी रहा हूं
यहीं जिंदगी हैं
और में जिए जा रहा हूं
लेखक राकेश वर्मा राजस्थान

