जब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तो मोल कहाँ कुछ रह पाए।
फिर किसकी इच्छा शेष रहेगी, कैसे मन से कह पाओगे?
जो चाहा समय से पहले मिले, तो मिलने का भी पता न चले, फिर क्या पाया, क्या खोया तुमने, अंतर्मन से क्या कह पाओगे?
जब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तब समझोगे क्या मोल पसीने का, वो जो हिम्मत और थकान का था, वो सफर कहाँ इतना सरल था?
कांटों पर ही तो चलकर, उस कोमल पथ को पाना था, अंधियारे के डर को जीत, खुद अपना साथी बन जाना था।
फिर देर क्या और जल्दी क्या, एक दिन तो यह सब होना ही था।
Anupama Arya
Place: Agra, Uttar Pradesh

