सुबह-सुबह स्कूल की घंटी, बस्ता लेकर आया,
टीचर बोली– “पढ़ ले बेटा,
बोर्ड का साल है
भाई!”
पर जब खोले किताबें
मैंने, आँखों में आंसू आए,
अंकों ने ऐसे तंग
किया, जैसे दुश्मन घर
में आए!
मुझे मैथ न आए,
मुझे साइंस न आए,
फॉर्मूले देख के दिमाग
घूम जाए!
न्यूटन, आर्किमिडीज़, सब सर के
ऊपर जाए,
मुझे मैथ न आए,
मुझे साइंस न आए!
लैब में पहुँचा टेस्ट
ट्यूब लेकर, शिक्षक बोले “टाइट्रेशन कर!”
रंग बदलने से पहले ही
यारों, सब कुछ नीचे
गिरा कर!
मित्र हँसे बोले – “डॉक्टर-वैज्ञानिक हट जा!”
मैं बोला – “भाई, कल्चर-आर्ट
में मेरा भविष्य जम
जा!”
मुझे मैथ न आए,
मुझे साइंस न आए,
Periodic Table मुझे रुलाए!
Plus-Minus का झगड़ा न सुलझे,
सारे नंबर मुझसे घबराए!
मुझे मैथ न आए,
मुझे साइंस न आए!
मम्मी बोली – “थोड़ा और कोशिश कर
ले बेटा,”
मैं बोला – “मम्मी, दिमाग का सुई टूट
चुका है ज़रा!”
पापा बोले – “ज़िंदगी में काम पड़ेगा
ये सब,”
मैं बोला – “पापा, मोबाइल में कैल्कुलेटर है
अब!”
मुझे मैथ न आए,
मुझे साइंस न आए,
लेकिन दिल में सपने
कई छाए!
टीचर बोली – “भविष्य क्या करोगे तुम?”
मैं बोला – “मैडम, आर्ट्स में अपना नाम
बनाए!”
क्योंकि मुझे मैथ न
आए, मुझे साइंस न
आए,
पर मेरी सोच दुनिया
बदल जाए!

