सुना है मैंने बहुत कुछ अपने बारे में, सबकी कहानियों में खुद को अलग-थलग पाया है। कहीं कोई किरदार, कहीं रंग-रूप, तो कहीं सिर्फ नज़रियों का साया है। कभी…
Read moreमेरा घर उस गली में बसता है, जहाँ लोगों का दिल और दिमाग खुलता है। बड़ा सा बगीचा, उसमें झूलता एक झूला, शाम की चाय और पड़ोसियों से गपशप का सिलसिला। …
Read moreजब यूँ ही सब कुछ मिल जाए, तो मोल कहाँ कुछ रह पाए। फिर किसकी इच्छा शेष रहेगी, कैसे मन से कह पाओगे? जो चाहा समय से पहले मिले, तो मिलने का भी पता न …
Read moreकौन हूँ मैं? अपने अंतर्मन की आवाज़ हूँ, दर्पण हूँ, अपने कल के सपनों की। अपनी ऊंची उड़ान की पंख हूँ, खुशबू हूँ अपनी ही बगिया की। अपने ही सवालों का ज…
Read moreकुछ ना भी हुआ तो क्या होगा? मैं चलते-चलते रुक जाऊँगी। रुककर मैं शायद देर से चल पाऊँगी, अपनी कहानी को दुनिया के सामने, देर से रख पाऊँगी। इसी झुंझला…
Read moreमिल जाए तो ज़िंदगी, बिछड़ जाए तो ज़िंदगी, हंसी है ज़िंदगी, ग़म है ज़िंदगी, दो पल सुकून है ज़िंदगी। कड़वाहटों के बोझ तले, दबी हुई है ज़िंदगी, कभी ज़मी…
Read moreभेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी, लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी। थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की, ब…
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