मिल जाए तो ज़िंदगी, बिछड़ जाए तो ज़िंदगी, हंसी है ज़िंदगी, ग़म है ज़िंदगी, दो पल सुकून है ज़िंदगी। कड़वाहटों के बोझ तले, दबी हुई है ज़िंदगी, कभी ज़मी…
Read moreभेजना चाहती हूँ, वर्तमान में खुद को एक चिट्ठी, लिखूँगी जिसमें मन की बातें, जो कभी कह ना सकी। थोड़ा प्यार, बहुत सारी शिकायतें, खुद के साथ न होने की, ब…
Read moreकह देने भर से क्या सब सही हो जाता है, वक्त का रूठना और जिंदगी का छूटना। बीते लम्हों में फिर से खो जाना, अधूरी यादों को किसी डायरी में कैद कर पाना। …
Read moreबीते लम्हों से बस, इतना ही है कहना, आकर यादों की दहलीज पर, अब सताया ना करो। जो बीत गया है, उसे बीता ही रहने दो, नई ज़िंदगी के दरवाज़े पर, दस्तक ना …
Read moreडॉ.चिलुका पूष्पलता एम.ए , एम . फिल , पी.एच.डी , अनुवाद में डिप्लोमा , एम.बी.ए। हिन्दी विभाग दयानंद सागर कला , विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद…
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