जन्नत

ग़र फ़िरदौस-ए-बरूहे ज़मीं अस्तो हमीं अस्तो। हमीं अस्तो। हमीं अस्तो। जन्नत है धरती पर सुना था मैंने लेकिन जन्नत कभी देखा नहीं, मगर...
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प्यार पहले और बाद में

आवारा बंजारा कहा दूंदू वही चहरा जिसे देखकर , लम्हे कदम बदने से इंकार कर जाते थे , सूरज की किरने कितनी भी तेज हो , मेरी नजरो ...
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तमाशबीन वर्तमान

 राकेश कुमार वर्मा कपकपाती रौशनी को देखने,  हुजूम उलटते हैं। डरते हैं, कतराते हैं, साहिब...... फिर भी, कदम न रुकते हैं। होंटों पे ...
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बीते वर्ष से गुहार

राकेश कुमार वर्मा ऐ वक्त तू कुछ पीछे लोट जा, कुछ अधूरे काम निपटाने हैं मुझे। कही हँसी छूटी हैं तो कही गम संभालना हैं, मेरे अपनों का ...
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इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो

इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो  किसे पता कब कौन बेवफा निकले  किया था प्यार 'साहिल' भी कभी  दरिया की रवानी से  मौज इ तूफान...
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बढ़ रहा ऊपर निडर पहाड़

उचें ऊँचें पर्वत व् पहाड़  छू रहे गगन को  उनकी आकृति प्रकृति  ललचा  रही मन को  ऊँचें नीचें रास्तों से  जा रहा  हु मिलने  उ...
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नेता और अभिनेता

बहुत समानता है  नेता और अभिनेता में अभिनेता बदलता रूप  कभी नायक  कभी खलनायक कभी जोकर  तो कभी लोफर  हर फिल्म में बदलता रू...
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आदमी का मूल्य..

आदमी का मूल्य घाट गया है भाव डूब गया है भौतिकता के भंवर में नैतिकता का नाव छुट गया है मानवता का पतवार बैठा 'साहिल' सोच...
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जीने की तमन्ना है...

जीने की तमन्ना है  जीना चाहता हूँ  एक दो पल  हँसना चाहता हूँ  हंसीं ओठों से निकले  या दिल से आये  ये तय होता ही नहीं  किस...
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एक ख्वाहिश एक एहसास...

पलकों के झरोखों में  एक चाँद सा चेहरा दिखता है  कल्पना की कनवास पर  एक छवि सी बनती है  मई चाहू न चाहू तेरी याद आ ही जाती है...
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मद मस्त होली ...

ठण्ड को करने विदा  आया मौसम फागुन का  लिए साथ में मस्ती उमंग  और होली का रंग  हरे, गुलाबी, नीले, पीले  लाल बैगनी और काले  र...
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माँ सरस्वती...

माँ सरस्वती भगवती  सुन ले मेरी विनती  विद्ध्य, बुद्धि और विवेक दे  सद्गुण, शील, सत्य का ज्ञान दे  सदाचार से सम्पन्न कर दे  अ...
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जिंदगी की राह पे...

जिंदगी की गस्त में एक नन्हा सा जान लेकर उंगली का सहारा था शीखा चलना दौरना और खेलना सीखा था हँसाना लोगों के साथ चलना पर इसी जि...
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ज्यों पतझड़ का मौसम...

न कर उदास मन को जी भर के जी जीवन को गम का मौसम क्षणिक है ज्यों पतझड़ का मौसम न हो हतास न हो उदास बरसेगी मेघा बुझेगी प्यास सूरज...
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दीप जलाओ

महलों की छत से मत झांको, आओ बंधु नीचे आओ इन वीरान अंधी गलियों में कोई आकर दीप जलाओ सारा शहर उजियारे से रोशन है गंदी बस्ती में तम का श...
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