*ऐ शहर*

*ऐ शहर*

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है, और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है   // *ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है  // तू *बच्ची* को भी *...
Read More

स्वपन

गहरी नींद मेँ विचारों का बोझ बनता तरह तरह के स्वपन कभी मन को कचोटता कभ करता उल्लास विचारों के गलियारों मेँ भवन निर्माण की तरह गु...
Read More
चेतना

चेतना

मनोवैज्ञानिक कहते हैं, दो तरह के लोग होते हैं। एक तो वे लोग, सुबह जिनकी चेतना बहुत प्रखर होती है और सांझ होते-होते धूमिल हो जाती है। दूसरे व...
Read More
चेतना

चेतना

मनोवैज्ञानिक कहते हैं, दो तरह के लोग होते हैं। एक तो वे लोग, सुबह जिनकी चेतना बहुत प्रखर होती है और सांझ होते-होते धूमिल हो जाती है। दूसरे व...
Read More