Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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एक काम करो। Do a Work Poem


 

एक काम करो, फ़ुरसत में तुम खुद को याद करो।

क्या भूल गए खुद को? या अब भी याद करते हो?
​आखिरी बार खुद से बात कब की थी?
बाकियों को छोड़ो... खुद से मुलाकात कब की थी?
​औरों में तुम इतना उलझ गए, कि सब से पूछ लेते हो—"ठीक हो?"
पर क्या कभी खुद से पूछा है? या बस... जाने देते हो?
​आखिरी बार मुस्कुराए कब थे? खुद की कहानी जानते हो?
या वक्त के हाथों लुटते हो?
​समय को थामो, निकल पड़ो।
जी लो अपनी सारी इच्छाएं, कल का क्या पता।
​बस एक काम करो...
खुद का दिल, खुद के नाम करो।
अपनी इच्छाओं को समझो, और समझो अपनी अहमियत।

By: Anupama Arya