एक काम करो, फ़ुरसत में तुम खुद को याद करो।
क्या भूल गए खुद को? या अब भी याद करते हो?
आखिरी बार खुद से बात कब की थी?
बाकियों को छोड़ो... खुद से मुलाकात कब की थी?
औरों में तुम इतना उलझ गए, कि सब से पूछ लेते हो—"ठीक हो?"
पर क्या कभी खुद से पूछा है? या बस... जाने देते हो?
आखिरी बार मुस्कुराए कब थे? खुद की कहानी जानते हो?
या वक्त के हाथों लुटते हो?
समय को थामो, निकल पड़ो।
जी लो अपनी सारी इच्छाएं, कल का क्या पता।
बस एक काम करो...
खुद का दिल, खुद के नाम करो।
अपनी इच्छाओं को समझो, और समझो अपनी अहमियत।
By: Anupama Arya

