मुझे गर्व है खुद पर, खुद की कहानी पर,
दुनिया को नहीं पता—मैं किस बहती नदी की धारा हूँ।
किस जद्दोजहद में हूँ मैं, और किस सफर से गुज़री हूँ,
मुकम्मल हूँ या अधूरी हूँ, और किस पीड़ा को पा रही हूँ।
क्या मेरे ख्वाब हैं, और कितने सपने टूटे हैं,
प्रेम में हूँ, प्रतीक्षा में हूँ, या जीवन के किस मोड़ पर हूँ।
दुनिया को नहीं पता ये, और पता होना भी नहीं चाहिए,
मेरी कहानी, मेरा सफर और मेरा अपना ही संघर्ष है।
कोई पल भर का साथी होगा, अंधेरी रातों का हमसफर होगा,
पर शून्य से अंत तक कोई न होगा—सब मेरे ही भीतर होगा।
राह में खुद ही चलना होगा, रुकना होगा या संभलना होगा,
अपनी इस कहानी में, खुद ही से खुद को मिलना होगा।
लोगों को नहीं पता, और न मुझे पता है—किसकी कहानी कैसी है,
मुझे मेरी कहानी से ताल्लुक है, मेरी कहानी सर्वश्रेष्ठ है।
किस सफर, किस राह पर हूँ—मुझे गर्व है इस कहानी पर,
मुझे गर्व है खुद पर—जैसी मैं हूँ, और जैसी मैं चल रही हूँ।
By Anupama arya


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