मन्नू भंडारी के साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना
गरिमा
सिंह (शोधछात्रा, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर)- garima.mantu786@gmail.com
डॉ०
परीक्षित सिंह (सहायक आचार्य,
हिन्दी विभाग, ए०पी०एन०पी०जी०, बस्ती उ०प्र०)
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परिचय
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वर्तमान समाज में मनोवैज्ञानिक
दृष्टिकोण में परिवर्तन हो चुका है। आज स्त्री- पुरुष एवं बच्चों की मानसिकता बदली
जा रही है। पुरुष एवं नारी की बदलती मानसिकता का वर्णन मनु जी ने अपने साहित्य में
खुलकर किया है। आज की नारी अहवादी व्यक्तित्व से पूर्ण है। वह अपनी अस्मिता को
जागृत रखने के लिए पुरुष की गुलामी नहीं वरन मित्रता एवं समानता चाहती है। उसने
अपनी अलग पहचान बना ली है। वह अपनी नियति पर आंसू बहाने की अपेक्षा अपने लिए बेहतर
जीवन की कामना करती है।
मुख्य शब्द
कामवृत्ति – वासना, ऋणशोध – कर्ज, दांपत्य
– पति-पत्नी संबंध, अनावरण – पर्दा हटाना, दांव-पेंच – चालाकी
सारांश -
मन्नू
जी ने मानव मनोविज्ञान को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने वाली सफल साहित्यकार हैं।
उन्होंने अपने जीवन की पीड़ाओं को भी अपने साहित्य में अभिव्यक्ति प्रदान की है।
मन्नू जी ने
पुरुष,नारी एवं बच्चों की विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं का
चित्रण पुरुष नारी एवं बाल मनोविज्ञान की सहायता से विस्तृत विवेचन अपने संपूर्ण
साहित्य में किया है | उन्होंने अपने कहानियों, उपन्यासों व
नाटकों के स्त्री-पुरुष पात्रों में निहित कुष्ठा इंद तनाव भावुक्ता संवेदनहीनता स्वार्थापन,
ढोंग, धोखेबाजी, ईर्ष्या
कार्यवृत्ति अह इत्यादि को प्रस्तुत किया है।
इनके कहानी 'ऊंचाई,
का पात्र अतुल एक भावुक व्यक्ति है जो अपनी प्रेमिका का विवाह किसी
अन्य से हो जाने पर विवाह नहीं करता है।
महाभोज नाटक व
उपन्यास में दा-साहब के धुर्तता भरी व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया है|
आपका बंटी में
शकुन और अजय के स्वार्थीपन को तथा कामवृत्ति को भी उकेरा है इन्होंने।
मन्नू जी के
सम्पूर्ण साहित्य में पात्रों की कुंठाओ की प्रस्तुती बड़े बेजोड़ ढंग से की गई जो
पाठक वर्ग को जोड़े रखने पर मजबूर कर देता है|
तथा उसके समान
जीवन में आने वाली परेशानियों से उबरने का सहारा भी बनता है|
शोध
प्रविधि
इस शोध कार्य को
वर्णनात्मक प्रविधि के माध्यम से किया गया है |
शोध
अंतराल
इस शोध कार्य को
नवीन व मौलिक बनाने का प्रयास किया गया है इस शोध पत्र के माध्यम से यह बताने का
प्रयास किया गया है कि आज के समय में कोई
भी व्यक्ति यदि किसी मनोग्रन्थि से प्रभावित है तो उसका जीवन किस तरह से प्रभावित
हो सकता है |
शोध
अध्ययन का महत्व
मन्नू
भंडारी के उपन्यास साहित्य में मनोवैज्ञानिकता पर केंद्रीत 'आपका
बंटी’
'आपका बंटी, मन्नू भंडारी का सुप्रसिद्ध और स्वतंत्र रूप से लिखा गया प्रथम उपन्यास है
जो तलाक शुदा दंपतियों के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ा है। यह कालजयी
उपन्यास हिंदी साहित्य की एक अमूल्य निधि है।
शोध
अध्ययन की उपयोगिता
यह उपन्यास
मन्नू जी द्वारा रचित एक बाल मनोवैज्ञानिक उपन्यास है| यह 16 भागों में विभक्त है इसका प्रकाशन 1971 में हुआ था |
इस उपन्यास की
शुरुआत शकून और बंटी के भावात्मक वर्णन के साथ होता है। इस उपन्यास के केंद्र में
बंटी है जो पारिवारिक विसंगति का शिकार है शकुन और अजय जो बंटी के मां-बाप हैं
उनका तलाक हो चुका है। किन्तु इस बात का पता बंटी को अपने दोस्त टीटू के द्वारा
चलता है। शकुन और अजय का असफल वैवाहिक जीवन का सबसे अधिक प्रभाव उनके बेटे बंटी पर
पड़ता है यह उपन्यास हर उस बच्चे की कहानी है जो इस प्रकार की परिस्थितियों के बीच
पीसकर अकेले जड़हीन और अनचाहे होते चले जाने को अभिशप्त हो गए।
तलाक की समस्या
पर केन्द्रित इस उपन्यास में मन्नू भंडारी ने बाल मनोविज्ञान के मार्मिक परतों को
खोला है। तलाक की इस समस्या के केन्द्र में बंटी है जिसके पिता अजय एवं मां शकुन
है। शकुन आधुनिक एवं स्वतंत्र विचारों वाली आधुनिक स्त्री है। वही अजय अभाव से भरा
हुआ पुरुष है। दोनों में कोई भी रिश्ते को बचाने को लेकर झुकने को तैयार नहीं है। वे
केवल एक- दूसरे के झुकाने की प्रतीक्षा करते हैं, ताकि एक बड़ा दिल करके दूसरे को माफ कर सकें। लेकिन ऐसा नही हुआ और अंततः
एक दिन दोनों के बीच तलाक हो जाता है। इन दोनों के स्वार्थ में बेटे का जीवन पिसता
चला जाता है। दोनों में से किसी के पास त्याग की भावना नहीं होती है|
स्वामी, उपन्यास में भी मिनी का विवाह घनश्याम के साथ होता है नरेन्द्र, घनश्याम और मिनी के वैवाहिक जीवन में तीसरे व्यक्ति के रूप में आता है।
नरेंद्र मिनी का पूर्व प्रेमी भी है। नरेंद्र के कहने पर मिनी ससुराल से भागकर
स्टेशन पर आ जाती है। इस प्रकार दांपत्य जीवन में तीसरे की आने से समस्या की
स्थिति उत्पन्न हो जाती है
अर्चन वर्मा
"मन्नू भंडारी का उपन्यास 'महाभोज, अपनी समग्रता में लेखिका की अपनी रचनात्मकता से इस प्रत्याशा को पूरा करता
है कि यह परिवेश के प्रति ऋणशोध है "
परिवेश का अर्थ जब वह माहौल हो जिसमें
राजनीति हवा की की तरह घुल गई है और सांस के साथ भीतर उतरकर जहर बन जाती है, और राजनीति का अर्थ जब वह अनीति हो जिसमें सत्ता की शतरंज के दाव-पेच
स्वत: साध्य बनकर राजनीति को आदमी की जिंदगी से बड़ा बना देता है तब परिवेश के
प्रति ऋणशोध का क्या अर्थ हो सकता है? 'महाभोज, में यह अर्थ शतरंज की चालों और उनकी काट, सह और मात
के दांव-पेचों की वह दर तह बारीक जांच और अनावरण के रूप में उपलब्ध किया गया है
अपने नैतिक धाराओं से च्युत राजनीति के सिद्धांत और नीतियां केवल जाली सिक्के हैं
जो धीरे-धीरे बाजार में खरे सिक्कों को बाहर कर देते हैं। जिस आदमी के लिए इन
सिद्धांतों की रचना हुई है ये नीतियाँ घोषित हुई हैं कि इस जंजाल में कहां है?
'महाभोज, की शुरुआत उसके शव से होती है और अंत
उसे मृत्यु के उपलक्ष में जीमते महाब्राह्मण के दृश्य से जिनके जीमते रहने के प्रबंध के लिए वह आदमी रोज मारा जाता
है।
गांव में बिसेसर
की हत्या हो जाती है। वह जिंदगी को प्यार करने वाला आदमी था। अपनी भी, औरों को भी। वह एक खतरनाक आदमी भी था क्योंकि वह हरिजन बस्ती के मजदूर को
अपने हक की पहचान सीखा रहा था। उस हक की जो सरकार की घोषित नीति के परिणाम स्वरूप
उन्हें मिला था मजदूरी का सरकारी रेट।
इस उपन्यास में बिकाऊ पत्रकार, मुखपर पट्टा बांधकर गांव में क्लास और कास्ट स्ट्रगल का अध्ययन करने वाले
शोधार्थी, मंत्रिमंडल की भीतरी उखाड़- पछाड़, चुनाव- युद्ध की उखाड़ पटक और राजनीतिज्ञों की अंतरात्मा की आवाज सभी की
कार्य- विधियों का जो गहरा परिचय लेखिका ने मनोवैज्ञानिक रूप में दिया है वह
निश्चय ही सराहनीय योगदान है।
निष्कर्ष
–
इस शोध पत्र के
माध्यम से हम व्यक्ति के परिस्थितियों व उसके मनोवैज्ञानिक स्थिति का यथावत
जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा ‘आपका बँटी’ में तलाक की समस्या से निजात पा सकते
हैं तथा कोई भी नया बँटी न हो पाए | निश्चय ही मन्नू जी के साहित्य की गणना
उत्कृष्ट कोटि में की जाएगी और जाती रही है।
संदर्भ
ग्रंथ
डॉ शर्मा मनीष, राठौर योगिता - 'मन्नू भंडारी के कहानी साहित्य में मनोवैज्ञानिक चेतना’
सहायक
ग्रंथ
भण्डारी मन्नू -'आपका
बंटी' उपन्यास पृष्ठ संख्या 8
इंटरनेट
स्रोत
डॉ वर्मा सीमा – ‘आपका बंटी उपन्यास
में मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रायड, एडलर, युग
के सिद्धांतों के आधार पर अवचेतन के माध्यम से चेतन की परख’
