Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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चलो ऐसी जगह ढूँढते हैं Let's Go in Search of a Place Poem


 
चलो ऐसी जगह ढूँढते हैं,

खुद से तो हम बहुत मिल लिए।

​अब अपनों से जुदा लोग खोजते हैं,
सफ़र में कुछ अनजानी राहें चुनते हैं।

​रात के सन्नाटो में, दिन के उजाले में,
कुछ अलग तलाशते हैं।

​उनकी चाहतों को करीब से जानें,
अपनी आँखों में उनका दृष्टिकोण बसाएँ।

​क्या कसक होगी, क्या पीड़ा होगी?
क्या उन्हें भी, हम जैसों की प्रतीक्षा होगी?

​शायद उनके पास भी जीने के नए सबक हों,
अनकहे किस्से और अनसुनी कहानियाँ हों।

​एक कोरा कागज हो,
और बार-बार कोशिश करने की इच्छा हो।

​चलो ऐसी जगह ढूँढते हैं,
जहाँ अपनी चर्चा और नुमाइश न हो।

​अंदाज़ जिनके हमसे जुदा हों,
जिनके ख़वाब हमारी परिधि से ऊँचे हों।

​इसी ज़मीन पर उनकी भी बस्तियाँ हों,
जो सादगी में भी मुकम्मल और खुश हों।

​जो हमारे वजूद के दूसरे पहलू हों,
जो एक ही दर्पण के अलग-अलग अक्स हों।

​एक ऐसी कहानी जो हमारी चेतना को जगाए,
और उम्मीदों का फिर एक नया सवेरा लाए।

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