ममता कुमारी
पीएचडी स्कॉलर
( दिल्ली विश्वविद्यालय )
सारांश
यह लेख फेक
न्यूज़ से संबंधित है | 21 वीं शताब्दी में हर कोई जनता है कि फेक न्यूज़ क्या होती
है | लेकिन अधिकतर लोग फेक न्यूज़ कितने प्रकार की होती है | फेक न्यूज़ भिन्न-भिन्न
रूप में कम नुकसानदायक अधिक नुकसानदायक रूप में व्यक्ति, समाज, राष्ट्रीय,
अंतरराष्ट्रीय रूप से लघु इकाई से लेकर दीघ्र इकाई तक समस्त मानव और उसके संसार को
प्रभावित करती है इसलिए फेक न्यूज़ को सही रूप से समझना इस लेख का सारांश है |
सोशल मीडिया और फेक न्यूज़
फेक न्यूज़ क्या है ? फेक न्यूज़ हमें
किस तरह प्रभावित करती है ? फेक न्यूज़ आज एक विश्वव्यापी समस्या है | जिससे हर देश
जूझ रहा है| मनुष्य आपस में विचारों का आदान प्रदान करता है कभी भाषा के माध्यम से
कभी लिखित भाषा के माध्यम से | मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं एक-दूसरे पर उसकी
निर्भरता है | जिसका मुख्य कारण यह है कि मनुष्य की भौतिक सीमाएं है जिसके कारण वह
हर जगह उपस्थित नहीं रह सकता है | इस समस्या के समाधान के रूप में मनुष्य ने सदैव
ही संचार प्रणाली को अपने संप्रेषण का माध्यम बनाया है | सन्देशवाहक के रूप में संवादिया और घोड़ों का
प्रयोग पुरातनकाल में किया था | आज मनुष्य
ने संप्रेषण के लिए तमाम तकनीकों का विकास किया है जैसे पत्र, समाचार पत्र, टेलीफोन, टेलीविजन, वैकल्पिक
सोशल माध्यम जैसे फेसबुक, एक्स, इन्स्टाग्राम, youtube ,और अन्य तमाम अधिकारिक वेबसाइट|
सोशल मीडिया के वैकल्पिक माध्यमों के
कारण ही भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है | आज सूचना का माध्यम मात्र समाचार पत्र
ही नहीं हैं हमारे पास भिन्न-भिन्न प्लेटफार्म हैं जिसके द्वारा हम सूचना प्राप्त करते हैं | इन्ही भ्रमजाल में विकास होता है
झूठी खबरों का जिसे हम फेक न्यूज़ कहते हैं|
फेक न्यूज़ किसे कहते हैं
“फर्जी खबर का मतलब है ऐसी खबर जो पूरी तरह से झूठ हो-गढ़ी गई हो[i]” फेक
न्यूज़ तीन प्रकार की होती है|
1”.दुष्प्रचार (MISINFORMATION) जानबूझकर गलत जानकारी देना और नुकसान पहुँचाने के लिए बनाई गई सामग्री | यह तीन अलग-अलग कारकों से प्रेरित है: पैसा
कमाना; विदेशी या घरेलू राजनीति पर प्रभाव डालना; या इसके लिए परेशानी पैदा करना |
2. गलत सूचना (MISINFORMATION) झूठी सामग्री, लेकिन शेयर करने वाले व्यक्ति को यह एहसास
नहीं होता कि यह भ्रामक है | अक्सर गलत सूचना का एक हिस्सा किसी ऐसे व्यक्ति
द्वारा उठाया जाता है जिसे यह अहसास नहीं होता कि यह झूठी है और नुकसान पहुँचाने के
इरादे के बिना इसे अपने नेटवर्क के साथ साझा करता है |
3. गलत सूचना (MALINFORMATION) वास्तविक जानकारी जो नुकसान पहुँचाने के इरादे से सन्दर्भ से हटकर साझा की
जाती है|”[ii]
क्लेयर वार्डल के लेख ‘सूचना विकार को समझना, में गलत, असत्य या
दुर्भावनापूर्ण सूचना के 7 सामान्य प्रकारों की पहचान की गई है|
सूचना विकार को समझना
फर्स्ट ड्राफ्ट,क्लेयर वार्डल-2020 से
1”.व्यग्य/पैरोडी- नुकसान पहुचानें का कोई इरादा नहीं है, लेकिन मूर्ख बनाने
की क्षमता है (सबसे कम हानिकारक)|
2.गलत कनेक्शन-जब शीर्षक दृश्य या कैप्शन सामग्री से मेल नहीं खाते (कम हानिकारक)|
3.भ्रामक सामग्री-किसी मुद्दे या व्यक्ति को गुमराह करने के लिए सूचना का
उपयोग किया जाता है (कम हानिकारक) |
4.गलत सन्दर्भ-जब वास्तविक सामग्री को गलत संदर्भ जानकारी के साथ साझा किया
जाता है (हानिकारक)|
5.नकली सामग्री-जब वास्तविक स्रोंतों का प्रतिरूप किया जाता है ( अधिक
हानिकारक)|
6.हेरफेर की सामग्री-जब धोखा देने के लिए वास्तविक जानकारी या छवि को तोड़ मरोड़
कर पेश किया जाता है ( अधिक हानिकारक) |
7.मनगढ़त सामग्री- नई सामग्री जो 100% झूठी है, धोखा और नुकसान पहुचाने के लिए
बनाई गई है (सबसे हानिकारक)”[iii]
फेक न्यूज़ बहुत ही पेचीदा मुद्दा है, सुनने में यह जितना ही सरल लगता है अपने
भिन्न-भिन्न रूपों में बहुत जटिल है | फेक न्यूज़ राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक,
सांस्कृतिक, धार्मिक सभी तत्वों को प्रभावित करता है | यह कार्य अगर व्यक्तिगत रूप
में होता है तो यह किसी भी देश के लिए अधिक खतरनाक नहीं होता लेकिन जब यह किसी
समूह या किसी राजनीतिक प्रसिद्धि या सामाजिक अवेहेलना या लोकप्रियता के लिए किया
जाता है या धार्मिक श्रेष्ठता के लिए तब यह फेक न्यूज़ सम्पूर्ण वास्तविकता के लिए
वैश्विक चुनौती बन जाता है | इन समस्याओं को मद्देनजर रखते हुए अमेरिका के पूर्व
राष्ट्रपति 2016 में फर्जी खबरों पर बराक ओबामा ‘”अगर हम अंतर नहीं बता सकते तो
हमारे सामने समस्या है,राष्ट्रपति बराक ओबामा ने फेसबुक और अन्य मीडिया
प्लेटफार्मों पर फर्जी खबरों के बारे में बोलते हुए कहा कि इससे अमेरिका राजनीतिक
प्रक्रिया को कमजोर करने में मदद मिली है”[iv]|
ओबामा ने यह भी कहा कि यह आधुनिक युग की सबसे बढ़ी समस्या है जहाँ कौन सी खबर फेक
है और कौन सी सही है यह एक मुख्य समस्या है और किसी भी देश के नागरिकों के लिए
भ्रामक है जो उन्हें सच्चाई से कोसो दूर लेकर जाता है|
फेक न्यूज़ को बढ़ावा देने का काम राजनीतिक स्तर पर भी किया जाता है | कई बार
अपने प्रिय नेता की छवि अच्छी बनाने के
लिए दूसरे नेताओं के ख़िलाफ़ झूठी खबरों को फैलाकर उसकी सत्ता को कमजोर करने की
कोशिश की जाती है | सूचनाओं के आदान प्रदान का कार्य पहले अधिकारिक कार्यालय
द्वारा होता था जिसकी जानकारी समाचार
पत्रों, रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से दी जाती थी | सरकार अपनी जबावदेही से बचने के लिए पत्रकारों
से भागती है और अन्य वैकल्पिक माध्यम जैसे एक्स (x ) सोशल मीडिया या फेसबुक के माध्यम सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को सार्वजनिक करती है | यह काम
कभी-कभी बड़े-बड़े नेताओं के समर्थक भी करते हैं | कई बार तो नेताओं के नाम से झूठी आई डी (id) सोशल प्लेटफोर्म पर
बनाई जाती है | एक ही व्यक्ति के नाम पर हजारों लोग अपने मन की बात को अपने प्रिय
नेता के फर्जी नाम के माध्यम से प्रकाशित एंव प्रेषित करते हैं |
फेक न्यूज़ कैसे उपभोक्ता को प्रभावित करती है
फेक न्यूज़ उपभोक्ता को भिन्न भिन्न
रूप में प्रभावित करती है | इन समस्याओं की जटिलता को समझते हुए समय-समय पर कई शोध
किये गए हैं | जैसे “एजेंसी प्यू रिसर्च (2016) में जब लोगों से फेक न्यूज़ के बारे
में पुछा गया तो 88 फीसदी उत्तरदाताओं ने
कहा की इनकी वजह से भ्रम फैलता है | उनमें से एक चौथाई ने यह भी कहा की उन्होंने
कभी न कभी किसी राजनीतिक फेक न्यूज़ को शेयर भी किया है | लेकिन इन उत्तरदाताओं को
फेक न्यूज़ की पहचान करने की अपनी क्षमता पर जबर्दस्त भरोसा है | 39 फीसदी लोगों ने
कहा कि वह हर हाल में फेक न्यूज़ को पहचान कर लेंगे | 45 फीसदी लोगों को लगता है कि
वे फेक न्यूज़ को आमतौर पर पहचान लेंगे | 9 फीसदी अपने बारे में आश्वस्ता नहीं है |
जबकि 6 फीसदी लोगों ने माना कि ने फेक
न्यूज़ को नहीं पहचान पाएंगे”[v]|
इसी संदर्भ में “एमएम जैंग और जेके
किम (2018) का शोध इस मामले में एक और नजरिया सामने लाता है| उन्होंने अमेरिका में
1299 लोगों के सैंपल साइज पर किए गए शोध में पाया कि जो लोग यह मानते हैं कि फेक
न्यूज़ का असर औरों पर जाता होता है ,वे लोग फेक न्यूज़ से निपटने के लिए मीडिया लिट्रेसी यानी लोगों में जागरूकता लाने के
पक्षधर हैं”[vi] | इसी संदर्भ में “भारत में फेक न्यूज़ का अध्ययन
करने वाले प्रतीक सिन्हा ने जब चर्चित न्यूज़ की लिस्ट बनाई तो उसमें
हालाँकि ज्यादातर फेक न्यूज़ बीजेपी को फायदा पहुचाने के लिए थी | लेकिन ऐसा भी
नहीं हैं कि कांग्रेस या विपक्ष को फायद पहुँचाने वाली फेक न्यूज़ नहीं फैलाई गई |
अगर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाने का कोई असर नहीं होता, तो पार्टियाँ और उसके
समर्थक इस काम को इतनी शिद्दत के साथ न करते”[vii] |
फेक न्यूज़ का प्रयोग क्यों किया जाता है?
फेक न्यूज़ का प्रयोग राजनीतिक फायदे के लिए भी किया जाता है | पॉपुलैरिटी
लोकप्रियता या प्रसिद्धि के लिए भी किया जाता है | यह एक प्रकार का बिजनेस भी है अन्य
जिसमें शेयर लाइक सब्सक्राइब द्वारा पैसे
कमाने के लिए भी किया जाता है | तमाम तरह के विचारधारा के लोग अपने मत के समर्थन
के लिए भी फेक न्यूज़ के द्वारा अपनी वैचारिकी पृष्ठभूमि को मजबूत करनें के लिए भी
फेक न्यूज़ का प्रयोग करतें है | कभी-कभी किसी पोपुलर व्यक्ति की छवि को खराब करने
या उसे लाभ या हानि पहुँचाने के लिए भी
किया जाता है | पक्ष और विपक्ष भी अपने समर्थकों द्वारा फेक न्यूज़ का प्रयोग कर के
अपने हक़ में जनमत तैयार करने के लिए भी फेक न्यूज़ का प्रयोग करते हैं | फेक न्यूज़
का प्रयोग मात्र क्षेत्रीय स्तर पर ही नहीं होता बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर भी किया जाता है | ताकि अपने देश की रणनीति को उचित तरीके से प्रस्तुत
किया जा सकें |
फेक न्यूज़ मात्र व्यक्तिगत त्रुटि नहीं है अगर यह मात्र व्यक्तिगत दोष ही होता
तो आज फेक न्यूज़ वैश्विक मुद्दा नहीं होता | फेक न्यूज़ को बढ़ावा देने का कार्य
पावरफूल लोग अपनी पकड़ को बनाए रखने के लिए भी करते हैं | फेक न्यूज़ का काम पहले
मात्र सिनेमा में मिर्च मसाले के लिए अफवाहों के रूप में किया जाता था लेकिन धीरे-धीरे
फेक न्यूज़ राजनीति, समाज, धर्म, संस्कृति, जैसे महत्वपूर्ण समूहों में भी करामात
दिखाने लगा जिसके कारण फेक न्यूज़ आज विश्वव्यापी समस्या है | व्यापार से लेकर
युद्धों तक आतंकवाद से लेकर राजनीतिक स्तर पर फेक न्यूज़ ने वास्तविकता से लोगों को
गुमराह किया है|
फेक न्यूज़ से बचाव के प्रावधान
फेक न्यूज़ से बचाव के लिए सरकार द्वारा कई तरह के प्रावधान किए गए है | साथ ही
साथ विद्वानों द्वारा किस तरह फेक न्यूज़ से बचें इसके लिए भी कई प्रकार के सुझाव दिए
गए है | जैसे- फैक्ट-चेक के लिए फेक न्यूज़ की पहचान करने वाले विद्वानों को
संस्थागत रूप से दायित्त्व देना | फेक न्यूज़ के प्रभाव को कम करने वाली तकनीकों का
इस्तेमाल करना | “राष्ट्रीय अपराध रिकोर्ड ब्यूरों के अनुसार वर्ष 2020 में भारतीय
दंड संहिता (IPC) की
धारा 505 के तहत फर्जी/झूठी खबर/अफवाह का प्रसार करने वाले लोगों के विरूद्ध करवाई
भी हुई”[viii] |
इस संबंध में अन्य कई प्रमुख “सूचना
अधिनियम (मध्यस्थ निशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार सहिंता) नियम 2021 प्रस्ताव
करता है कि प्रेस सूचना ब्यूरों की तथ्य परिक्षण इकाई द्वारा परिक्षण किये गए और
इसमें भ्रामक या झूठे पाए गए कंटेट को सोशल मीडिया प्लेटफोर्म से हटाना आवश्यक है |
आईटी अधिनियम 2008 की धारा 66 इलेक्ट्रॉनिक संचार से संबंधित अपराधों को
नियंत्रित करती है| आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और महामारी रोग अधिनियम 1897 ऐसे
फेक न्यूज़ पर अफवाहों के प्रसार को नियंत्रित करते हैं जो नागरिकों में दहशत पैदा
कर सकते हैं | भारतीय दंड संहिता 1860 यह दंगों का कारण बनने वालीं फर्जी खबरों और
मानहानि का कारण बनने वाली सूचनाओं को नियंत्रित करता है |”[ix]
मीडिया लिट्रेसी या जागरूकता को बढ़ावा
देना |
कानूनों को सशक्त करना है |
जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना |
मानव अभिव्यक्ति को ध्यान में रखते हुए आलोचनात्मक विवेक को बढ़ावा देना |
संदर्भ सूची
[i] https://www.bbc.co.uk/bitesize/articles/z4xvn9q
[ii] https://subjectguides.lib.neu.edu/fakenews
[iii] https://subjectguides.lib.neu.edu/fakenews
[iv]https://www.theguardian.com/media/2016/nov/17/barak-obama-fake-news-facebook-social-media
[v] मंडल दिलीप,
यादव गीता, अन सोशल नेटवर्क, राजकमल प्रकाशन,
[vi] मंडल दिलीप,
यादव गीता, अन सोशल नेटवर्क, राजकमल प्रकाशन,
[vii] मंडल दिलीप,
यादव गीता, अन सोशल नेटवर्क, राजकमल प्रकाशन,
[viii]https://www.drishtiias.com>hindi
[ix] https://www.drishtiias.com>hindi

0 Comments