नरेन्द्र कोहली के रामकथात्मक उपन्यास : परम्परा और प्रयोग

  • डॉ. एम. नारायण रेड्डी

Abstract

: भारतीय वाङ्मय में वाल्मीकि-रामायण से प्रेरणा प्राप्त कर अनेक काव्य, नाटक, उपन्यास आदि लिखे गये हैं और अब भी लिखे जा रहे हैं। पुराणों में भी रामकथा को महत्त्वपूर्ण स्थान मिला है। अनेक विदेशी भाषाओं में रामकथा का अनुवाद, रूपांतर, विकास और विस्तार हुआ है। अब तक के काव्य रूपी रामकथा को समकालीन उपन्यासकार नरेन्द्र कोहली जी ने गद्य का रूप दिया है। अर्थात् उन्होंने उपन्यास के शिल्प-विधान के अनुसार ‘रामचरितमानस’ की रामकथा को औपन्यासिक रूप देकर एक नया प्रयोग हिन्दी साहित्य में किया है। इस प्रकार का प्रयोग किसीने अब तक नहीं किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र में नरेन्द्र कोहली जी के रामकथात्मक उपन्यासों का विवेचनात्मक अध्ययन परम्परा के सापेक्ष्य में किया गया है। इस नये प्रयोग को युगबोध के सन्दर्भ में भी परिशीलन करने का प्रयत्न किया है। इसमें वस्तु की वियशेषता बताते हुए उपन्यासों एवं मानस में बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड और उत्तरकाण्ड के प्रमुख प्रसंगों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। फिर आलोच्य उपन्यासों में जो नये प्रसंगों का प्रस्ताव किया गया है उनका भी समालोचन करने का प्रयास किया गया है और उन में जो युगबोध परिलक्षित होता है उसका अंकन भी करने का प्रयत्न किया है।

Published
2022-01-11