आनंदमय शिक्षा और बहुसांस्कृतिक समाज

  • डॉ. शैला चव्हाण

Abstract

विविधता में एकता यही पहचान पुरे विश्व में भारत की है| विभिन्न जाति धर्म, वंश, पंथ और भिन्न–भिन्न भाषा बोलने वाले लोग यहाँ रहते हैं, दिन-ब-दिन हम भी एक साथ सभी जीवन यापन करते हैं, और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी सुख और शांति से गुजारने का प्रयास करते हैं| और यह सब हमारे लिए आसान नहीं होता है, क्योंकि हर एक को अपना धर्म, वंश, जाति, समाज, भाषा, अत्यंत प्रिय होते हैं| यह हम सब के लिए अत्यंत संवेदनशीलता का कारण भी होते हैं| परंतु खंडप्राय देश के नागरिक होने के कारण प्राकृतिक रूप से विविधता का स्वीकार करते हुए हमें विविधता में एकता को निभाना है|मे भारत देश में एकता और अखंडता बरकरार रखनी है| यही तो हम सब का प्रथम कर्तव्य है| तभी तो सीना तान कर कह सकते हैंसारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा और इस पंक्ति को प्रत्यक्ष रूप में लाने के लिए हमें प्रयास करने होंगे| सभी को राष्ट्रीयता की भावना को मन में रखकर राष्ट्रप्रेम का परिचय देना होगा तभी यह कहना उचित होगा देश हा देव असे माझा| विविधता में एकता की भावना के लिए हर भारतीय देश, समाज और व्यक्ति के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं| राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीयता की भावना की ऊंचाई का कोई नापतोल नहीं है| इसका प्रमाण भारत का स्वतंत्रता संग्राम है| यहां अपनी मातृभूमि के लिए मर मिटने वालों की कमी नहीं है, इस कार्य में पुरुषों के साथ साथ महिला भी पीछे नहीं रही, अनेक महिलाओं ने इस संग्राम में अपना योगदान दिया था|

Published
2021-08-30