सेवाराम यात्री के उपन्यासों में भाषा शैली का विलक्षण रूप

  • मधु रानी

Abstract

 साहित्य जगत में सेवाराम यात्री जी ने किरतीमान स्थापित किया है। उनके द्वारा उधृत कृतियाँ लगातार प्रगतिपथ पर अग्रसर होती जा रही हैं। इनके द्वारा रचित रचनाओं की भाषा शैली में विलक्षण स्वरूप की अनुभूति होती है। जिसका अनुमोदन पाठक शहरसह करते हैं। किसी भी साहितिक रचना का स्वरूप उसकी भाषा शैली पर निर्भर करती है। भाषा शैली साहित्य का ऐसा तत्व है जिसका सम्बन्ध समपूर्ण कथा के साथ होता है। उसका उचित उपयोग  भाषा के स्वरूप पर निर्भर करता है। तथा उसी पर साहित्य की सफलता निर्भर करती है। मनुष्य के विचारों का आदान-प्रदान जिस माध्यम से होता है वे भाषा ही है। भाषा के विषय में ‘भोलानाथ तिवारी’ के मतानुसार, “भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम सोचते हैं तथा अपने विचारों को व्यक्त करते हैं”। भाषा भावों अथवा विचारों को स्पष्ट करने का साधन है इसमें शिल्प का अभिव्यक्ति पक्ष भाषा से सम्बन्धित होता है।

Published
2021-08-30