धरती आबा नाटक का नाट्यशास्त्रीय अनुशीलन

  • डॉ. अंशुमान वल्लभ मिश्र

Abstract

धरती आबा’ ऋषिकेश सुलभ द्वारा रचित नाटक एक ऐसा क्रांतिकारी नाटक है, जिसमें मुंडा एवं धानी समाज के जन आन्दोलन का स्वर्णिम इतिहास है| यह इतिहास रचनेवाला बिरसा मुंडा कोई साधारण मनुष्य नहीं था; बल्कि मुंडा समाज के लिए भगवान था, जिसके पास मात्र उत्साह ही नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने की निष्ठा और समर्पण की भावना थी| बिरसा द्वारा उलगलान आन्दोलन ने बिरसा को धानी समाज का भगवान बना दिया था| आदिवासियों को लगातार जल, जंगल और जमीन के लिए प्राकृतिक संसाधनोंसे वंचित किया गया| आदिवासी अपने अधिकारों के लिए माँग करते रहे, लेकिन ब्रिटिश शासन ने सदैव इनका शोषण किया | इतिहास के दृष्टिकोण से आदिवासियों का  संघर्ष अठ्ठरहवी  शताब्दी से ही  चल  रहा है| ‘ १७६६ ई. के पहाडिया, विद्रोह से लेकर १८५७ की आजादी के बाद भी संघर्ष चलता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली| बिरसा मुंडा ने एक नया इतिहास रच डाला. १८९५ में बिरसा ने अकेलेही अंग्रेजोंद्वारा  लागू कि गयी जमीदारी प्रथा और राजस्व व्यवस्था के विरुद्ध, संघर्ष करते हुए  जल, जंगल एवं मुंडाओंके अधिकारों की लडाई का सूत्रपात  किया| "बिरसा के मन मे  उन  सुदखोर  महाजनोंके  प्रति आक्रोश था, जो अंग्रेजों की चापलूसी करते थे और आदिवासियों को कर्ज देकर उनकी जमीने  हडप लेते थे| अंग्रेजों की कुनीतियों का बिरसा को अनुभव हो गया था, इसीकारण उलगुलान जैसा- अभियान एक आन्दोलन बन गया| यही वो बिरसा मुंडा है, जिसने मात्र धानी मुंडाओं के लिए ही संघर्ष नहीं किया; बल्कि समस्त भारतीय जन जातियों के लिए महापुरुषत्व का कार्य किया|

Published
2021-08-04