सौंदर्य-भावना के परिप्रेक्ष्य में जयशंकर प्रसाद और कुमारनाशान के काव्यों का तुलनात्मक अध्ययन |

  • डॉ.जार्ज जोसफ

Abstract

जयशंकर प्रसाद और कुमारनाशान दोनों सौंदर्य के कवि थे | इनकी सौंदर्य कल्पना में पार्थिव और अपार्थिव दोनों का महत्व है |दोनों एक ओर प्रकृति के रम्य एवं मनोहर सौंदर्य - से इन्द्रिय तृप्ति पता है तो दूसरी ओर उसे चेतन के रहस्य और पवित्रता का ज्ञान करनेवाली साधन के रूप में भी एहसास करते हैं | शस्वत आनंद प्राप्त करनेवाली पकृति  स्वच्छन्दतावादी कवि के मानसिक आनंद का सहारा है और सामाजिक विषमता के कारण भ्र्ष्ट मानव को अपने चिरसौंदर्य दर्शन के द्वारा पवित्र और सुशील बनाती है |सौंदर्य भावना  स्वच्छन्दतावादी काव्य की सहज वृत्ति है |सौंदर्य का आकर्षण अनोखा होता है, जिसका सम्बन्ध मनुष्य के भावात्मक संवेगों के साथ है | इस सौंदर्य तत्त्व के प्रति प्रसाद और आशान पर्याप्त सचेत दीख पड़ते हैं |उनके काव्यों में सौंदर्य के दोनों रूप - बाह्य  सौंदर्य एवं अन्तः सौंदर्य भिन्न -भिन्न प्रकार से अनुभूति का विषय बन गए हैं |

Published
2021-08-01