डॉ. भीमराव अम्बेडकर : एक राजनीतिक दृष्टि

  • अभय कुमार
  • प्रो. अखिलेश्वर प्रसाद दुबे

Abstract

डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी भारत में दलितों, निर्बलों, गरीबों तथा हरिजनों के लोकप्रिय नायक थे। वे भारतीय विधिवेत्ता थे। वे एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी होने के साथ-साथ भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार भी थे। उन्हें बाबा-साहेब के नाम से भी जाना जाता है। बाबा साहेब अम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली और भारतीय समाज में सर्वव्यापित जाति व्यवस्था के विरूद्ध संघर्ष में बिता दिया। हिन्दू धर्म में मानव समाज को चार वर्णों में वर्गीकृत किया है। उन्हें बौद्ध महाशक्तियों में दलित आन्दोलन को प्रारम्भ करने का श्रेय भी जाता है। बाबा साहेब अम्बेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है, जो भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है। कई सामाजिक, राजनीतिक और वित्तीय बाधाएं पार कर अम्बेडकर उन कुछ पहले अछूतों से एक बन गये जिन्होंने भारत में कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की। अम्बेडकर ने कानून की उपाधि प्राप्त करने के साथ ही विधि, अर्थशास्त्र व राजनीतिक विज्ञान में अपने अध्ययन और अनुसंधान के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से कई डॉक्टरेट डिग्रियाँ भी प्राप्त की। आम्बेडकर वापिस अपने देश देवताओं की भूमि भारत देश के एक प्रसिद्ध विद्वान के रूप में लौट आए। ऐसे महान महापुरुष के जीवन व जन्म के बारे में भी जानना उतना ही आवश्यक है जितना कि देश की प्रगति के लिए एक सच्चे और निष्पक्ष, ईमानदार, विद्वान, समाज सुधारक की जरूरत है, जो सभी मानव कल्याण को यानि छुआछूत के ऊपर न्याय की बात रखता हो, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग से सम्मिलित क्यों न हो।

Published
2020-01-15