स्वास्थ्य एवं पर्यावरण, स्वच्छता : गॉधी, अम्बेडकर एवं समसमायिक समाज एक दार्शनिक दृष्टिकोण

  • अभय कुमार सेठ

Abstract

प्राचीन काल से वर्तमान तक हम असभ्य से सभ्य समाज की ओर लगातार अग्रसर हो रहे है। जैसा की हम सभी बुद्धिजीवी यह महसूश कर रहे है कि स्वास्थ्य परम धन है तथा पर्यावरण और उसकी स्वच्छता एक अच्छे समाज और स्वास्थ्य के लिये जरूरी है। राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी और डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को आज वर्तमान समसामायिक समाज की समस्याओं से तथा उनके विचारों को वर्तमान में आरोपित करने पर दार्शनिक दृष्टिकोण द्वारा हम यह प्राप्त करते है कि उन महापुरूषों ने जो जीवन जीने की कला तथा अंग्रेजी में कहावत भी है कि जीवन संघर्ष है, जीवन जीने की कला सीखनी चाहिए इस प्रकरण से मैं यह बताने का प्रयास करना चाहता हूॅ कि शरीर माध्यम, खलु धर्म साधनम् अथार्त शरीर के स्वस्थ्य होने से ही हम किसी भी साधन का या उपागम का सदुपयोग कर सकते है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने एक जगह हरिजन लोगों को यह बताने का प्रयास किया है कि आप लोगों को भी  स्वच्छ, स्वस्थ्य, समानता और समाज में बराबर का दायित्व निर्वहन करना चाहिए। यह विचार महात्मा गॉधी से काफी मिलता जुलता है। महात्मा गॉधी जी ने कहा था कि मानव को विचारों की शुद्धता की स्थापना के लिये नैतिकता की स्थापना जरूरी है

Published
2020-03-17