एक महान आत्मा

  • रिशु राज

Abstract

एक दीन-दुखी से भी दुखी 
दुबला पतला सा एक बुढ्ढा
साधारण कद का आदमी
उम्र की बोझ से झुकीं पीठ 
हाथ में थामे एक डंडा 
गोल गोल शीशों वाला 
आँख में लगा चश्मा 
कहते है सब 

Published
2017-04-15