एक ख्वाहिश एक एहसास

  • हिमांशु हंसराज

Abstract

पलकों के झरोखों में 

एक चाँद सा चेहरा दिखता है 

कल्पना की कनवास पर 

एक छवि सी बनती है 

मई चाहू न चाहू

तेरी याद आ ही जाती है 

न जाने तेरी बांटों में क्या जादू है 

हर पल कानों में सुनाई देती है 

क्या बताऊ जनम दिल बेकाबू है 

नजरें सिर्फ तुम्हे तलाशती है 

Published
2017-04-14