हृदय –प्राण

  • Ms आरती

Abstract

विरान हुए आकाश का सूनापन 

तुम -

क्यों धारण किए हो ?

संसार की नीरवता को 

तुम -

क्यों खुद में कैद किए हो ?

क्यों मेरे हृदय के प्राण ? 

                      - क्यों ?

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क्यों तुम वृक्षों के 

पत्तों की तरह 

हवाओं के सहारे बह गए ?

क्यों तुम फूलों की 

ताजगी, महक को छोड़ 

चुपचाप मुरझा गए ?

Published
2017-05-10