किस किस को आजमाऊ मैं

  • बिनय शर्मा

Abstract

किस किस को आजमाऊ मैं

किस किस को मनायुं मैं

भर गए है सरे जख्म

मिट गए है सरे गम

पर ये जो दिल है

चाहता है फिर जख्म खायुं मैं

लिखें है कुछ नज्म

और याद आया है ग़ज़ल

चाहता हूँ सुनायुं मैं

तभी अचानक

Published
2017-05-16