ओठों पे तेरा नाम था

  • शिवाय श्रेष्ठ

Abstract

दिल को आराम था 
ओठों पे तेरा नाम था 
एक हशीन इल्जाम था 
साहिल’ रुसवा सरेआम था 
कितना हशीन वो शाम था 
मेरे लिए वो एक इनाम था 
मन साहिल बदमान था 
हाथों में जाम था 
दिल को आराम था 
ओठों पे तेरा नाम था 
Published
2017-05-13