ऐसे ही होते है हमारे नेता

  • तृप्ति कुमारी

Abstract

थोरी सी खटपट
दोस्ती झटपट
अपने बातों में
फंसायें फटाफट
दिलाये दर्शकों को
मजा फटाफट
लोग हो जाये हंसके लोटपोट
ख़त्म कर दे मन का खोट
लगाकत शब्दों का मरहम
बन ले दुश्मनों को हमदम
और मांगने लगते है वोट
ऐसे ही होते है

Published
2017-05-12