ऐ मेरे भगवान मेरी भी विनती सुन

  • उमेश कुमार

Abstract

ऐ मेरे भगवान 
मेरी भी विनती सुन 
बना मुझे महान 
एक सच्चा इन्सान 
रहूँ मैं हरदम 
छल कपट से अनजान 
पर रहे मरते दम 
मेरे मन में, कार्य में 
प्रेम, दया और सहानुभूति 
करू सदा मैं उन्नति 
ऐसी देना मेरी मति 
मुझ पर उपकार करना 
इतना जरुर देना 
कि सदा रहे घर में 
दो वक्त की रोटी 
Published
2017-05-11