बचपन

शादी मे (buffer) खाने में वो आनंद नहीं जो पंगत में

आता था जैसे....  

👉 पहले जगह रोकना !

👉 बिना फटे पत्तल दोनों का सिलेक्शन!

👉 उतारे हुयें चप्पल जूतें

पर आधा ध्यान रखना...!

👉 फिर पत्तल पे ग्लास रखकर उड़ने से रोकना!

👉 नमक रखने वाले को जगह बताना

यहां रख नमक

.

सब्जी देने वाले को गाइड करना

हिला के दे

या तरी तरी देना!

.

👉 उँगलियों के इशारे से 2 लड्डू और गुलाब जामुन,

काजू कतली लेना

.

👉 पूडी छाँट छाँट के

और

गरम गरम लेना !.

👉 पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ

गया !

अपने इधर और क्या बाकी है।

जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना

.

👉 पास वाले रिश्तेदार के पत्तल में जबरदस्ती पूडी

🍪 रखवाना !

.

👉 रायते वाले को दूर से आता देखकर फटाफट रायते

का दोना पीना ।

.

👉 पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी। उसके

हिसाब से बैठने की पोजीसन बनाना।

.

👉 और आखिर में पानी वाले को खोजना।

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जब बचपन था, तो जवानी एक ड्रीम था...

जब जवान हुए, तो बचपन एक ज़माना था... !! ____________________________

जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी...

आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है... !!

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कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था...

आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है... !!!

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स्कूल में जिनके साथ ज़गड़ते थे,

आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते है... !!

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ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है...

बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है...

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काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल..

.काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार...!!

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जब हम अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे और लोगों से कहते फिरते थे देखो मैंने अपने हाथ जादू से हाथ गायब कर दिए

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✏जब हमारे पास चार रंगों से लिखने वाली एक पेन हुआ करती थी और हम सभी के बटन को एक साथ दबाने की कोशिश किया करते थे |

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जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे ताकि अगर कोई आये तो उसे डरा सके..

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जब आँख बंद कर सोने का नाटक करते

थे ताकि कोई हमें गोद में उठा के बिस्तर तक पहुचा दे |

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सोचा करते थे की ये चाँद हमारी साइकिल के पीछे पीछे क्यों चल रहा हैं |

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On/Off वाले स्विच को बीच में

अटकाने की कोशिश किया करते थे |

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फल के बीज को इस डर से नहीं खाते थे की कहीं हमारे पेट में पेड़ न उग जाए |

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बर्थडे सिर्फ इसलिए मनाते थे

ताकि ढेर सारे गिफ्ट मिले |

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फ्रिज को धीरे से बंद करके ये जानने की कोशिश करते थे की इसकी लाइट कब बंद होती हैं |

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सच , बचपन में सोचते हम बड़े

क्यों नहीं हो रहे ?

और अब सोचते हम बड़े क्यों हो गए ?

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ये दौलत भी ले लो.. ये शोहरत भी ले लो

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन ....

वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी..

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एक बात बोलु

इनकार मत करना

ये *msg* जीतने मरजी लोगों को *send* करो

जो इस *msg* को पढेगा

उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.

क्या पता वो आपकी वजह से अपने बचपनमें चला जाए. चाहे कुछ देर के लीए ही सही।

और ये आपकी तरफ से उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.

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*Special

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