तुम जब चले गए तो फिर हमें आए याद बहुत

1.
 तुम जब चले गए तो फिर हमें आए याद बहुत
जिस गुलशन को बसाया था,हुआ वो बर्बाद बहुत

सब गलियाँ है सूनी,सब रास्ते हो गए उदास बहुत
दिन है मेरा सोया सोया,और जागा है रात बहुत

जहाँ तक देखा था वो भी कम कुछ नहीं था
लेकिन कई अफसाने छिपे थे उसके बाद बहुत

जब था मौका तो रोक नहीं पाए जाते कदमों को
अब होगा भी क्या करके यूँ भी  फरियाद बहुत 

अगर रोने से ही खुश हासिल है तो हैं हम शायद बहुत
तुम्हें समझ नहीं पाया,दिल हमारा था सैय्याद बहुत

सलिल सरोज

2.
छत,दरवाज़े और दीवार सब ढह गईं
और वो ख़्वाब के आशियाँ बनाता रहा

बस्तियाँ जल गईं उसकी आँखों के आगे
और वो परियों की दास्ताँ सुनाता रहा

जो दोस्त थे सबसे ही दूरियाँ बना ली 
और रकीबों से मोहब्बत निभाता रहा

जो अच्छाइयाँ थी मझमें सब छिपा दी
और बुराइयाँ उँगलियों पे गिनाता रहा

थी कीमत बहुत ज्यादा ईमानदारी की
सो वो सरेआम अपनी बेईमानी भुनाता रहा

इंसाँ सब बँट गए हिन्दू और मुस्लिम में
सियासत मजहबी तराने गुनगुनाता रहा

सलिल सरोज


यह मेरी स्वरचित एवं अप्रकाशित रचना है।
पता
सलिल सरोज
B 302 तीसरी मंजिल
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट
मुखर्जी नगर

मोब 9968638267


लेखक परिचय सलिल सरोज जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)। शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011), जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)। प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका"कोशिश" का संपादन एवं प्रकाशन, "मित्र-मधुर"पत्रिका में कविताओं का चुनाव। सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश।पंजाब केसरी ई अखबार ,वेब दुनिया ई अखबार, नवभारत टाइम्स ब्लॉग्स, दैनिक भास्कर ब्लॉग्स,दैनिक जागरण ब्लॉग्स, जय विजय पत्रिका, हिंदुस्तान पटनानामा,सरिता पत्रिका,अमर उजाला काव्य डेस्क समेत 30 से अधिक पत्रिकाओं व अखबारों में मेरी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। भोपाल स्थित आरुषि फॉउंडेशन के द्वारा अखिल भारतीय काव्य लेखन में गुलज़ार द्वारा चयनित प्रथम 20 में स्थान। कार्यालय की वार्षिक हिंदी पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित। ई-मेल:salilmumtaz@gmail.com


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