आपको देखके न जाने क्या क्या सोचते होंगे

Image result for beautiful indian womanआपको देखके न जाने क्या क्या सोचते होंगेज़मीं पे सरगोशी करता कोई चाँद सोचते होंगे
क्या कोई आतिश थी या कोई नर्म फुहारफ़िज़ा से आपके जाने के बाद सौ मर्तबा सोचते होंगे
आपकी निगाहों से उजाले की कोई नहर बहती हैवीरान शहर में आपको गली आबाद सोचते होंगे
आपकी परछाई की ये कशिश भी तो देखिएजिस पे भी पड़ी,खुद को शमशाद सोचते होंगे
आप जिस जिस से भी मिली ज़माने मेंमरहबा सब खुद को बेइन्तहां शाद  सोचते होंगे


लिल सरोज




यह मेरी स्वरचित एवं अप्रकाशित रचना है।
पता
सलिल सरोज
B 302 तीसरी मंजिल
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट
मुखर्जी नगर

मोब 9968638267


लेखक परिचय सलिल सरोज जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)। शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011), जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)। प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका"कोशिश" का संपादन एवं प्रकाशन, "मित्र-मधुर"पत्रिका में कविताओं का चुनाव। सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश।पंजाब केसरी ई अखबार ,वेब दुनिया ई अखबार, नवभारत टाइम्स ब्लॉग्स, दैनिक भास्कर ब्लॉग्स,दैनिक जागरण ब्लॉग्स, जय विजय पत्रिका, हिंदुस्तान पटनानामा,सरिता पत्रिका,अमर उजाला काव्य डेस्क समेत 30 से अधिक पत्रिकाओं व अखबारों में मेरी रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। भोपाल स्थित आरुषि फॉउंडेशन के द्वारा अखिल भारतीय काव्य लेखन में गुलज़ार द्वारा चयनित प्रथम 20 में स्थान। कार्यालय की वार्षिक हिंदी पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित। ई-मेल:salilmumtaz@gmail.com
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