दिल का ताज-


नाराजी मे भी कोई राज है
झूठा  दिल का ताज है
जिसपे कहाते थे नाज है
शरमिंदा करता हमको आज है
कहते थे जो ख्वाबो मे हररोज है
वोही बना नमुन्किन सी खोज है
सोचते थे जो चीज अजीज है
अजी अजीज छोडो, वो तो नाचीज है



डॉ  सुनिल जयंत कुलकर्णी

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