लोकसंस्कृति के आयाम

किसी भी समुदाय का लोक रीतिरिवाजों से जुड़ा रहता है। 
जिसकी अपनी अलग भाषा इस पर आधारित मान्यताएं
त्यौहार लोक में प्रचलित मौखिक कथाएँ
गाथाओं लोकगीत प्रगीत नुक्कड़ नाटक
जातक कथायें विभिन्न संस्कारों की अपनी रीत होती है। 
जिसे मनुष्य लोक में ग्रहण करता है। 
आदिकाल से ही मनुष्य इन्ही संस्कारों को ग्रहण करता चला है।
समाज में व्याप्त कुरीतियों को छोड़कर 
संस्कारों को ग्रहण कर जन समुदाय अपनी संस्कृतियों को सँजोये रखता है।
लोक में व्याप्त नदी नालों पहाड़ों मिट्टी बर्फ का लोकजीवन मेँ अक्सर प्रभाव पड़ता है।
मुकेश चन्द
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