एक ख्वाहिश एक एहसास...

एक ख्वाहिश एक एहसास...

पलकों के झरोखों में 
एक चाँद सा चेहरा दिखता है 
कल्पना की कनवास पर 
एक छवि सी बनती है 
मई चाहू न चाहू
तेरी याद आ ही जाती है 
न जाने तेरी बांटों में क्या जादू है 
हर पल कानों में सुनाई देती है 
क्या बताऊ जनम दिल बेकाबू है 
नजरें सिर्फ तुम्हे तलाशती है 
कैसे बताये साहिल कितना तड़पता है 
यादों के लहरें छू कर चली जाती है 
और बाकि रह जाती है 
एक ख्वाहिश 
एक एहसास 
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल' 
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