बीते वर्ष से गुहार

राकेश कुमार वर्मा
बीते वर्ष से गुहार

ऐ वक्त तू कुछ पीछे लोट जा,
कुछ अधूरे काम निपटाने हैं मुझे।
कही हँसी छूटी हैं तो कही गम संभालना हैं,
मेरे अपनों का धर्म संभालना हैं।
कहावत बनकर न रह जाये,
कही मुआमले मरहम के।
कही दबिश में न गुजर जाये,
कोपले नये रंग के।
जरा सा रुक, कहानियाँ बन जायेगी,
दो लम्हात में जिन्दगानियां संवर जायेगी।
फिर हो आगाज़ नये साल का,
जब सारी की सारी गुथियां,
सुलझ जायेगी।।
यहीं सोच तुझको ये लेख लिख डाला,
एक दो पंक्ति नही', पूरा पृष्ठ भर डाला।
ऐ मेरे यारों, मेरे अपनों मुझे माफ़ करना,
मलिन पड़े मान को जरा साफ करना।
गलतियाँ मेरी मुझे अनुज समझना,
सुधरने का मौका, इस दनुज को देना।
हैं मर्म अभी बाकी तुम भी दया दिखाना,
जीवन सरल हो ऐसा, मार्ग बतलाना।
इन बीते क्षणों की, लाज रखना,
हमे भी दिलके पास रखना।।।
नव वर्ष की शुभ कामनाएं।।।
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