ज्यों पतझड़ का मौसम...

ज्यों पतझड़ का मौसम...

न कर उदास मन को
जी भर के जी जीवन को
गम का मौसम क्षणिक है
ज्यों पतझड़ का मौसम
न हो हतास न हो उदास
बरसेगी मेघा बुझेगी प्यास
सूरज की गर्मी का कहर क्षणिक है
ज्यों पतझड़ का मौसम
बेनूर जहाँ गम है यहाँ
कौन किसका कबतक है यहाँ
तू खवाब नया आँखों में सजा
खुशी का रूठना क्षणिक है
ज्यों पतझड़ का मौसम
प्रीत की गीत गा
जग की तो ये रीत है
बोल दे मन का कौन मनमीत है
दह जायेगी ये तो बालू की भीत है
प्रीत सास्वत है जग का बंधन क्षणिक है
ज्यों पतझड़ का मौसम 
Shashikant Nishant Sharma
Share on Google Plus

About Pen2Print Services

0 comments:

Post a Comment