इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो

इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो

इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो 
किसे पता कब कौन बेवफा निकले 
किया था प्यार 'साहिल' भी कभी 
दरिया की रवानी से 
मौज इ तूफानी से 
यद् है हम भी दीवाने थे कभी 
यार का जबसे छूता दमन 
विराना हो गया दिल का चमन 
सोचता हु कभी फिर उनसे मुलाकात हो 
दिल की बांटें हो न हो आँखों से बरसात हो 
और बुझे जज्बातों के दीये जले 
सुना है 'साहिल' आँखों की नमी से 
दिल के पौधें देते है नै कोपलें 
जनता हु पतझड़ है ये जीवन 
फिर भी इंतजार है की आये सावन 
और फिर से दिल के फुल खिले
उन्हें ये बता देना हवाएं 
उन्हें याद दिला देना फ़िजाए
उनकी याद में हम दिन-रत जले 
वे बेरहम है फिर भी मेरे सनम है 
उन्ही के लिए बस रुकी है सांसें, ये भी कहो 
इश्क करो तो आँखों में अश्क रखो 
- शाश्कांत निशांत शर्मा 'साहिल' 
Shashikant Nishant Sharma
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