दीप जलाओ

दीप जलाओ

महलों की छत से मत झांको, आओ बंधु नीचे आओ
इन वीरान अंधी गलियों में कोई आकर दीप जलाओ
सारा शहर उजियारे से रोशन है
गंदी बस्ती में तम का शासन है
केवल रईस तो रोशनी का हकदार नहीं
झुग्गी को क्या दीपक का अधिकार नहीं
गरीबी के आँचल के तले से ये अँधियारा हटाओ।
जो अनाथ है उनके चेहरे
खुशियों से हो जाए सुनहरे
जिन बच्चों ने अंधेरा देखा
उनके जीवन में दीया जले
मैले से दिखते बच्चों के चेहरों पर मुस्कानें लाओ।
इस दीवाली हर दर पर खुशियाँ हो
खिली-खिली जीवन बगिया हो
सब के होंठों पर मुस्कान रहे
अंधेरों का न नामोनिशान रहे
अमीरी गरीबी की खाई पट जाए यह ऐसा त्योहार मनाओ।
परिचय -
साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,
कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि में कुछ रचनाएं प्रकाशित।
अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।
पता :
विनोद कुमार दवे
206
बड़ी ब्रह्मपुरी
मुकाम पोस्ट=भाटून्द
तहसील =बाली
जिला= पाली
राजस्थान
306707
मोबाइल=9166280718
ईमेल = davevinod14@gmail.com
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