फिर तेरी याद आई- 'आवारा'

दिल के दरवाजो पर दस्तक देती,
तेरी यादे,
दूर चमकते तारों से मिलवाती हैं।
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दिन दोपहरी तो कट जाती हैं इनसे,
छुपते छुपाते,
धुप उतरते ही आके लिपट जाती हैं,
तेरी यादे।
उलझन में टटोलता हूँ बार बार,
तेरी फेसबुक प्रोफाइल,
कोई अपडेट न पाकर,
सिमट जाती हैं,
तेरी यादे।
अहम के दल में,
प्रेम के बल में,
सोचकर के तू कहाँ जी पायेगी मेरे बिन,
कह तो दिया, के
हम जी जायेंगे अकेलेपन में,
मगर,
चार घड़ियों से ही,
तेरी कमी दिखाती हैं,
तेरी यादे।
चाहकर भी कदम आगे तो उठा नही सकता साहिल,
मगर,
लहरे बनकर साहिल को,
बह निकलने का,
मंजर समझाती हैं,
तेरी यादे।।
- आवारा बंजारा
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