फिर तेरी याद आई-1-'आवारा'

जब जब आईने में देखा चेहरा,
सच कहते हैं,
तू नजर आया।
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माना के मजबूर हैं,
इस दुनिया के रिवाजो से,
मगर,
दिल में प्यार, बे-हिसाब हैं।
कुछ टूटे तो, कुछ संभल गए है,
ये तेरी ही तो ख्वाहिश थी, जिससे,
इतना पिघल गए हैं।
हा! तारीख गवाह बन जायेगी,
तेरी मेरी कुर्बानियो का,
अपनों की आह के लिए,
अपनी जान का सोदा करने का।
मगर मेरे लिए तो,
तू और मै,
बस उतना ही जहान हैं।
बाकि जो बच गया,
वो जलता कब्रिस्तान हैं।

 राकेश कुमार वर्मा
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